Essay On Sarojini Naidu In Marathi

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Dakshayani Velayudhan was born on July 4, 1912, on the island of Bolgatty in Cochin.

She was the leader of the (then titled) Depressed Classes.

सरोजनी जी की माता वरद सुन्दरी देवी एक लेखिका थी, जो बंगाली में कविता लिखा करती थी. उनके एक भाई वीरेन्द्रनाथ क्रन्तिकारी थे, जिन्होंने बर्लिन कमिटी बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी.

इन्हें 1937 में एक अंग्रेज ने मार डाला था व इनके एक और भाई हरिद्र्नाथ कवी व एक्टर थे.सरोजनी जी बचपन से ही बहुत अच्छी विद्यार्थी रही, उन्हें उर्दू, तेलगु, इंग्लिश, बंगाली सारी भाषओं का बहुत अच्छे से ज्ञान था.

“People outside have been saying that India did not give equal rights to her women.

Now we can say that when the Indian people themselves framed their Constitution they have given rights to women equal with every other citizen of the country.”.सरोजनी जी भारत देश की सभी औरतों के लिए आदर्श का प्रतीक है, वे एक सशक्त महिला थी, जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है.विभूति अग्रवाल मध्यप्रदेश के छोटे से शहर से है.ये पोस्ट ग्रेजुएट है, जिनको डांस, कुकिंग, घुमने एवम लिखने का शौक है.She was the first and only Dalit woman to be elected to the Constituent Assembly in 1946.Dakshayani sided with B R Ambedkar on many issues related to the Scheduled Caste community during the Born on July 3, 1897, to the Dewan of Baroda Manubhai Nandshankar Mehta, Hansa Mehta studied journalism and sociology in England.सरोजनी जी हम सब भारतीयों के लिए एक सम्मान का प्रतीक है, भारतीय महिलाओं के लिए वे एक आदर्श है, उनके जन्म दिन को महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है.सरोजनी जी का जन्म एक बंगाली परिवार में हुआ था, उनके पिता वैज्ञानिक व डॉक्टर थे, जो हैदराबाद में रहने लगे थे, जहाँ वे हैदराबाद कॉलेज के एडमिन थे, साथ ही वे इंडियन नेशनल कांग्रेस हैदराबाद के पहले सदस्य भी बने.उन्होंने अपनी नौकरी को छोड़ दिया और आजादी की लड़ाई में कूद पड़े.लिखने की कला को इन्होने अपना प्रोफेशन बनाया और घर बैठे काम करना शुरू किया.ये ज्यादातर कुकिंग, मोटिवेशनल कहानी, करंट अफेयर्स, फेमस लोगों के बारे में लिखती है.Belonging to the Pulaya community who were severely discriminated against, she was among the first generation of people to be educated from the community and the first woman to wear an upper cloth.In 1945, Dakshayani was nominated to the by the State Government.

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